शास्त्री जी की मौत का सच | The Truth Behind Lal Bahadur Shastri Death | | Lal Bahadur Shastri Jayanti |

 

शास्त्री जी की मौत का सच  | The Truth Behind Lal Bahadur Shastri Death | | Lal Bahadur Shastri Jayanti |


पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री उनके कद और किरदार को हम इस बात से समझ सकते हैं  कि उन्होंने चार शब्दों मे हिंदुस्तान की तकदीर और तस्वीर चमकाने का खांका खींच दिया था और वह चार शब्द थे जय जवान जय किसान । जब दुनिया जब दुनिया कोको lलगा था भारत चीन के युद्धह के बाद भारत टूट जाएगा पाकिस्तान को जवाब नहीं दे पाएगा तो वह शास्त्री जी ही थे पड़ोसियों के नापाक हरकतों का करारा जवाब दिया था


 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री जी का निधन हुआ कहा गया कि उन्हें दिल का दौरा यानी हार्टअटैक है लेकिन उनकी मौत पर अभी भी सवाल उठाए जा रहे हैं कई सवाल उठते हैं लेकिन आज तक जवाब नहीं मिला शास्त्री जी का निधन इतना रहस्य भरा क्यों है यह जानने के लिए आपको बताते हैं उस समय क्या कहलाते और खासकर उनके निधन की रात को क्या हुआ था ?


Lal Bahadur Shastri Death 

 शुरुआत ताशकंद और ताशकंद में हुए समझौते से करते हैं भारत पाकिस्तान 1965 युद्ध के बारे में आप जानते होंगे जो कि भारत चीन युद्ध के महस 3 साल बाद हुआ था इस बार प्रधानमंत्री की कमान श्री लाल बहादुर शास्त्री जी के हाथों में थी अगर शास्त्री जी के इरादों के बारे में जानना है उनका भाषण यादगार भाषण जरूर जाना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था

 “ तलवार की नोक पर या एटीएम बम के डर से कोई हमारे देश को झुकाना चाहे दबाना चाहे तो हमारा यह देश रखने वाला नहीं है “


“एक सरकार के नाते हमारा क्या जवाब हो सकता है सिवाय इसके कि हम हत्यारों का जवाब हथियारों से दें”


खैर 1965 युद्ध में भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश समझौते के लिए तैयार हो गए थे जनवरी 1966 को सोवियत रूस ने भारत पाकिस्तान समझौते के लिए तशकिन में एक सम्मेलन बुलाया पाकिस्तान की तरफ से जनरल आयोग खान और शास्त्री जी ने समझौते पर दस्तखत किए इसके मुताबिक दोनों पक्ष युद्ध से पहले की स्थिति में लौटने के लिए तैयार थे 


तशकिन सम्मेलन खत्म तो हुआ लेकिन देश के लिए गम की बहुत बड़ी खबर के साथ 11 जनवरी 1968 को तशकिन में ही लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी आखिरी सांस ली शास्त्री जी के प्रेस सचिव और मशहूर पत्रकार कुलदीप नैयर अपनी किताब बिऑन्ड  द लाइनस मैं उस रात की एक एक बात बताते हैं. नैयर मौत के वक्त रास्ते में थे कुलदीप नैयर लिखते हैं कि 

 “उस रात ना जाने क्यों मुझे शास्त्री जी की मौत का पूर्वाभास हो गया था किसी ने मेरे दरवाजे पर दस्तक दी तो मैं शास्त्री की मौत का ही सपना देख रहा था”


“मैं हड़बड़ा कर उठा और दरवाजे की तरफ लपका बाहर कोरिडोर में खड़ी एक महिला ने मुझे बताया आपके प्रधानमंत्री मर रहे हैं”


शास्त्री जी के निधन के वक्त उनके कमरे की हालत के बारे में नैयर कुछ इस तरह से बताते हैं

 “शास्त्री जी का कमरा एक बड़ा कमरा था उतने ही विशाल पलंग पर शास्त्री की निर्जीव देख रही थी पास ही कालीन पर बड़ी चर्तीब से उनके स्लिपर पड़े हुए थे उन्होंने इन्हें नहीं पहना था”


“ कमरे के एक कोने में पड़ी ड्रेसिंग टेबल पर एक थरमस लूड़का पड़ा था ऐसा लगता था कि शास्त्री जी ने इसे खोलने की कोशिश की थी कमरे में कोई घंटी नहीं थी”


सारी बातें करीब रात 2:00 बजे की है जिसके बारे में कुलदीप नैयर ने लिखा है दुनिया को यही बताया गया कि शास्त्री जी की मौत दिल का दौरा यानी हार्टअटैक से हुई है अब जो घंटी का सस्पेंस है उसके बारे में बात करते हैं शास्त्री जी की मौत के रहस्य में घंटी का जिक्र भी होता है।  शास्त्री जी के बेटे अनिल शास्त्री ने न्यूज़ चैनल से बातचीत में काकी लाल बहादुर शास्त्री के कमरे में ना तो घंटी देखना फोन और डॉक्टर का कमरा भी दूर था और अनिल शास्त्री का कहना है तशकिन में लाल बहादुर शास्त्री दहन को लेकर लापरवाही बरती गई थी


शास्त्री जी का थरमस साथ में नहीं आया और बाकी सब चीजें साथ में आए जैसे टोपी शेविंग मशीन उनके साथ नहीं आया उस पर भी सवाल उठ रहे हैं मौत पर कुछ और भी सवाल उठते हैं कुलदीप नैयर अपने किताब में लिखते हैं जब वह तशकिन से वापस लौटे तो शास्त्री जी की पत्नी “ललिता शास्त्री ने पूछा था कि शरीर नीला क्यों पड़ गया ?”


नैयर ने कहा था कि अगर शरीर पर लेप किया जाता है तो वह नीला पड़ जाता है इसके बाद भी शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री के सवाल कम नहीं हुई उन्होंने फिर पूछा शरीर पर यह जो चीरों के निशान है वह कैसे नहीं लिखते हैं कि यह सुनकर वह चौंक गए  क्योंकि ताशकंद या दिल्ली में शास्त्री जी का पोस्टमार्टम किया ही नहीं गया था


अब लाल बहादुर शास्त्री जी के बेटे अनिल शास्त्री भी यही कहते हैं कि उनका चेहरा मिला था और माथे पर दाग थे अनिल बताते हैं कि उस वक्त उनकी मां ने डॉक्टरों से बातचीत भी की थी और उनका भी कहना था आर्ट अटैक के मामले में दाग नहीं होने चाहिए हनी शास्त्री का कहना है कि इन सब चीजों से संदेह तो होना ही था। 


अब जो संदेह लगातार उठ रहे थे वह आरोप तब बन गए जब 2 अक्टूबर 1970 को शास्त्री जी के परिवार ने उनके जन्मदिन पर शास्त्री जी की मौत की जांच कराने की मांग की नहीं लिखते हैं कि शास्त्री जी के परिवार को शायद यह बात नहीं जम रही थी कि शास्त्री जी का खाना उनके निजी सेवक रामनाथ के सिवाय टीएम कॉल के बावर्ची जैन मोहम्मदी ने क्यों बनाया था ?


 हालांकि कुलदीप नैयर यह साफ करते हैं कि उन्हें आरोप थोड़ा अजीब लगा था क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री जब 1965 में मॉस्को गए थे तब  भी उनका खाना मोहअम्मदी ने ही बनाया था। बहरहाल यह भी कहा जाता रहा है कि निधन से ठीक बाद लाल बहादुर शास्त्री भारी दवाब मे थे उन्होंने दिल्ली फोन करके पूछा कि क्या इस समझौते से देश में खुश हैं सभी और उनकी सेक्रेटरी ने कहा कि सभी पहुंचा लेकिन ऐसा भी कहा जाता है कि उनके इस फैसले से उनके परिवार के लोग भी खुश नहीं थे


 और लाल बहादुर शास्त्री इस बात से बहुत परेशान थे उन्होंने अपने घर पर फोन भी मिलाया था बड़ी बेटी से बात भी हुई थी  लेकिन पत्नी ललिता शास्त्री से बात नहीं हो सकी वह उनसे नाराज बताई जा रही थी कुल मिलाकर यह भी कहा जाता है की  लाल बहादुर शास्त्री जी पर जवाब था जो वह उस रात को झेल रहे थे


अब अब हम इतनी सारी बातें कर रहे हैं और इसके बावजूद भी कुछ साफ-साफ नहीं कह सकते और आज भी शास्त्री जी की मौत पर कयास लगाए जा रहे हैं हाल ही में एक फिल्म भी आई थी The Tashkent Files लेकिन अफसोस इस फिल्म में खास चश्मे से तथ्यों को देखा गया लेकिन शास्त्री जी ने मौत के इतने सालों बाद में उनकी मौत पर सवाल उठते हैं बातें होती हैं कि उनकी मौत कैसे हुई 


CID OFFICER KAISE BANE


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