तनाव से बाहर निकलने की बेहतर कहानी - Motivational Story In Hindi For Depression,est motivational story,story for depression in hindi,inspirational story

तनाव से बाहर निकलने की बेहतर कहानी - Motivational Story In Hindi For Depression


Motivational Story In Hindi For Depression


नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे हिन्दी ब्लॉग मे मे दोस्तों आज मैं आपको ऐसी कहानी सुनने जा रहा हूँ जिसको सुनकर आपका नजरिया बदल जाएगा और आप अलग से सोचने लग जाओगे क्योंकि यह कहानी है ही ऐसी । दोस्तों अगर आप भी खुद मे कमिया देखते हो तो आप इस कहानी को पढ़कर आप खुद पर कमिया निकालना बंद कर दंगे औ यही आदत आपको कामयाबी की राह पर ले जाएगी । तो दोस्तों बिना आपका समय लिए शुरू करते है हम इस बेहतरीन कहानी को 


बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में एक किसान रहता था. वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था. इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था. उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा एक दम सही था. इस वजह से रोज़ घर पहुँचते-पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था.ऐसा दो सालों से चल रहा था.

सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है. फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा,मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ?

क्यों ?, किसान ने पूछा ,तुम किस बात से शर्मिंदा हो?


शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ, मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है, और इस वजह से आपकी मेहनत बर्वाद होती रही है., फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा.


किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला,कोई बात नहीं, मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो.

घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया, ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचते– पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा.


किसान बोला,शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था, और मैंने उसका लाभ उठाया. मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे ,


तुम रोज़ थोडा-थोडा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया. आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ. तुम्ही सोचो अगर तुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सब कुछ कर पाता?

दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है , पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं.... :)

 

तो दोस्तों कहानी कैसी लगी हमे कममेंट मे जरूर बताएं क्योंकि इस कहानी को पढ़कर आप कहीं न कहीं तो अलग सोचने लगे होंगे क्योंकि हम सब सिर आप ही नहीं मई भी पहले खुद पर कमियाँ निकालता था लेकिन मैंने अब खुद की कमियाँ निकालना बंद कर दिया है और हो सके तो आप भी अपनी कमिया निकालना बंद करें क्योंकि कई बार हारी कमियाँ ही हमारी ताकत बनती है 

 

और दोस्तों अगर आपके पास समय है तो हमारी इस कहानी को जरूर पढ़ें;- यह कहानी आपकी जिंदगी बदल देगी  क्योंकि इस कहानी मे बताया है कि कैसे एक लेखक के जीवन मे इतने कष्ट आए लेकिन फिर भी उसने कैसे अपने बुरे समय को अच्छे मे बदला आपको यह कहानी जरूर पद्धनी चाहिए क्योंकि आपके समय से ज्यादा कोई चीज मायने नहीं रखती 


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