गांधी ने भगत को क्यों नहीं बचाया ? | Gandhi Jayanti Special | Why Mahatma Gandhi Did Not Save Bhagat Singh

 

गांधी ने भगत को क्यों नहीं बचाया ? | Gandhi Jayanti Special |


इंकलाब जिंदाबाद  साम्राज्यवाद का नाश हो ऐसा कहने वाले वीर शहीद ए आजम भगत सिंह अपनी मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते फांसी पर  चढ़ गए.  भगत सिंह के जीवन और मृत्यु दोनों को ही लेकर अलग-अलग बातें की जाती हैं महात्मा गांधी के साथ उनके संबंधों को और भगत सिंह की मान्यताओं पर कई सवाल खड़े किए जाते हैं कई लोग महात्मा गांधी जी को भी भगत सिंह की फांसी का दोषी करार देते हैं क्या वाक्य में महात्मा गांधी के हाथ में था सब कुछ क्या वह फांसी को रुकवा सकते थे ?


अगर हां है इसका जवाब तो उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया उन्होंने भारत के वीर जवान को क्यों फांसी पर चढ़ने दिया  आपके इन्हीं जिज्ञासा को लेकर हम हाजिर हैं यह जानकारी लेकर. भगत सिंह एक ऐसा नाम जिसके खून में देश भक्ति ही भरी थी इस शख्स को देश को आजाद कराने के लिए उबाल आता था, उसके जीवन का लक्ष्य अंग्रेजों ने भारत को आजाद कराना था। 


Shaheed Bhagat Singh Story 

119 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने 12 साल के नन्हे भगत सिंह पर गहरा प्रभाव डाला था उनका विश्वास था की क्रांति मानव जाति का अपरिहार अधिकार है, स्वतंत्रता सभी का कभी न खत्म होने वाला जन्मसिद्ध अधिकार है. महात्मा गांधी के विचार  इससे बिल्कुल विपरीत थे वह अहिंसा में विश्वास करते थे उनका एक वाक्य था अहिंसा परमो धर्म इसका उन्होंने आजीवन पालन किया 


उनका मानना था यदि हिंसा करके हक हासिल किया जाए तो कल को लोग खून खराबा करके ही अपनी बात मनवा आएंगे हलकी विपरीत विचार धारा होने के बावजूद दोनों के बीच विचारों में कई समानताएं थी  भगत सिंह नास्तिक और महात्मा गांधी आस्तिक थे  लेकिन धर्म के खिलाफ नफरत पैदा करने वालों के दोनों ही खिलाफ थे । 


 देश के गरीब तख्ते के लोगों को हमें देना उन्हें शोषण से बचाना अंग्रेज मुक्त स्वतंत्र भारत देश बनाना यही दोनों का उद्देश्य था लेकिन महात्मा गांधी ने हमेशा का रास्ता चुना और भगतसिंह ने क्रांति का रास्ता चुना कई लोग समझते हैं भगत सिंह को फांसी असेंबली में बम गिराने की वजह से दी गई थी लेकिन यह सच नहीं है भगत सिंह को फांसी की सजा देने के पीछे की कहानी कुछ और ही थी। 


भगत सिंह को फांसी पर क्यों चढ़ाया गया था ?

 यह बात तब की है जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता लाला लाजपत राय साइमेन कमीशन के खिलाफ विरोध कर रहे थे और तब वहां लाठीचार्ज हुआ जहां पुलिस की लाठियों ने लाला लाजपत राय को इस कदर घायल कर दिया कि कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई यह बात जानकर भगत सिंह का खून खौल उठा इस करतूत का बदला लेने भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस सुपरीडेंट की हत्या करने की  योजना बनाई


 लेकिन एक साथी एक की गलती की वजह से एक 21 साल के पुलिस अधिकारी की हत्या हो गई हालांकि इस समय भगत सिंह पुलिस की गिरफ्त से बच गए थे लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने असेंबली में बम  भगत सिंह जनहानि नहीं करना चाहते थे लेकिन अंग्रेजी सरकार को यह जताना चाहते थे कि देश का युवा जाग गया है और अब इस देश पर युवाओं का और भारतीयों का वर्चस्व होगा ना कि अंग्रेजों का


 भगत सिंह और उनके साथी चाहते तो वहां से भाग सकते थे पर उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दे दी गिरफ्तारी के वक्त भगत सिंह के पास बंदूक भी थी और बाद में इस बात की पुष्टि हो गई21 साल के पुलिस अधिकारी की हत्या में भी यही बंदूक इस्तेमाल की गई थी और इसीलिए भगत सिंह को पुलिस अधिकारी साईनड्रिस की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुना दी गई जबकि उनके साथी बटेश्वर दत्त जोकि बम फेंकने मे भगत सिंह की बराबरी में थे उन्हें आजीवन कारावास दिया गया


हाला कि कई लोग महात्मा गांधी पर यह आरोप लगाते हैं कि भगत सिंह के मौत के जिम्मेदार महात्मा गांधी है क्योंकि यदि महात्मा गांधी पाते तो भगत सिंह की फांसी की सजा माफ किए बिना ब्रिटिश सरकार से समझौता स्वीकार नहीं करते.


  1930 में गांधी गूंज और अंग्रेजी सरकार के बीच संघर्ष जोरों पर भारत के राज्य व्यवस्था डगमगा गई थी जिसे सुधारने के लिए सरकार ने कई नेताओं को सम्मेलन में बुलाया था जिसमें गांधी जी और कांग्रेस ने हिस्सा नहीं लिया और यह सम्मेलन किसी काम का नहीं रहा इसके बाद  ब्रिटिश सरकार ने बातचीत का फैसला लिया


गांधीजी ने भगर्त सिंह को नहीं बचाया था ?


फरवरी 1931 में इरविन और गांधीजी के बीचबातचीत की शुरुआत की जिसके बाद 5 मार्च 1931 को समझौता हुआ लेकिन इस समझौते में केवल उन कैदियों को छोड़ने की बात की गई जो अहिंसक तरीके से संघर्ष करते हुए पकड़े थे लेकिन भगत सिंह राजकीय हत्या के मामले में फंसे थे इसलिए उनकी फांसी की सजा माफ नहीं की जा सकी


 जब समझौते की बात सामने आ पड़े जगह-जगह पर गांधी जी का विरोध किया जाने लगा साम्यवादी इस समझौते से नाराज थे प्रभाव में सड़कों पर गांधी जी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन नतीजा कुछ ना निकला और भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को 30 मार्च को फांसी दी गई और लोग आक्रोश में विरोध पर निकल पड़े


 यह आक्रोश अंग्रेजों के ही नहीं बल्कि गांधीजी के क्योंकि खिलाफ लोगों का कहना था कि क्यों गांधी जी ने भगत सिंह की सजा माफ किए बिना समझौता करने से इंकार नहीं कर दिया।  इस पर गांधी जी ने कहा भगत सिंह की बहादुरी के लिए हमारे मन में सामान इकट्ठा है लेकिन मुझे ऐसा तरीका चाहिए जिसमें खुद को निछावर करते हुए आप दूसरों को नुकसान ना पहुंचे हालांकि इन सबके बावजूद गांधी जी ने भगत सिंह को बचाने के लिए प्रयत्न किए और उन्होंने  कहा कि मैं जितनी तरीके से अग्रेज हुकूमत को समझा सकता था मैंने समझाया


23 मार्च को सुबह लिख दी मैंने अपनी चिट्ठी में फिर से अर्जी दी थी लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा कुछ ना निकला हालांकि गांधी जी ने जो बात कहीं और उस चिट्ठी के कोई सबूत ना मिलने पर कई लोगों का कहना है कि गांधीजी ने भगत सिंह को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया था और अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि गांधीजी का विरोध भगत सिंह के प्रति प्रेम से किया जाता है गांधी जी के खिलाफ आक्रोश में


 जो भी हो लेकिन हकीकत तो यहीं है वीर शहीदे आजम भगत सिंह को फांसी असेंबली में बम फेंकने के लिए नहीं बल्कि उसकी हत्या करने के मामले में दी गई थी जिसमें भगत सिंह को बचाने में महात्मा गांधी नाकामयाब रहे मित्रों आप आप सहमत हैं इस जानकारी से तो इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा सांझा करें धन्यवाद गांधी जयंती की शुभकामनाएं


Previous
Next Post »