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महात्मा गांधी “Essay” Mahatma Gandhi पर निबंध हिन्दी मे 


MAHATMA GANDHI ESSAY IN HINDI

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था। मोहनदास की माता का नाम पुतलीबाई था जो करमचंद गांधी जी की चौथी पत्नी थीं। मोहनदास अपने पिता की चौथी पत्नी की अंतिम संतान थे। महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेता और 'राष्ट्रपिता' माना जाता है

रूपरेखा 

1. प्रस्तावना 

2. गांधीजि का जन्म 

3. गांधी जी की शिक्षा 

4. महात्मा गांधी की जीवन की घटनाएं 

5. विशेषताएं 

6. गाँधीजी के जीवन के आदर्श 

7.विश्व मे स्थान 

8. उपसंहार 

9. महात्मा गांधी पर 10 लाइन पंक्तियां 

प्रस्तावना 

दे दी हमें आजादी खड्ग बिना ढाल । 

 साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल । 

सरदार में उसी पुरुष का जन्म सार्थक होता है जिसके द्वारा देश समाज और जाति की उन्नति हो वैसे तो इस परिवर्तन से संसार में कौन नहीं मरता और कौन नहीं पैदा होता इस कथन के अनुसार महापुरुष वही कहलाते हैं जिनका देश की जागृति और निर्माण में बड़ा योगदान रहता है


 भारत अनेक महापुरुषों की जन्म भूमि हैं राम,कृष्ण,गौतम बुद्ध,महावीर.नानक जैसे अनेक संत महात्माओं ने यहां जन्म लेकर इस भूमि को पवित्र किया। आधुनिक युग में एक ऐसे ही अहिंसा के अवतार महात्मा गांधी ने जन्म लिया जिसने हमें ना केवल सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया बल्कि हमें दास्ता के बंधक से भी मुक्त करवाया




गांधीजी का जन्म 

 हमारे यहां समय-समय पर महापुरुषों का जन्म हुआ है जिसे देश और समाज का कल्याण होगा है। 

 महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इस युग के निर्माता गांधीजी का  जन्म 2 अक्टूबर 1869 को काठियावाड़ के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ उनके पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी जी के पिता श्री राजकोट रियासत के दीवाने थे 


गुजरात में पिता का नाम सम्मिलित करके बोला जाता है इसलिए गांधी जो अपना हस्ताक्षरओं में मोहन दास करमचंद गांधी लिखते थे। 


 महात्मा गांधी प्रारंभ हुई 18 वर्ष की अवस्था में हाईस्कूल पास करने के बाद यह वकालत।  यह चलन के कारण शिक्षक और सहपाठी सभी के प्रिय थे। इनको छात्रवृत्ति और पुरस्कार प्राय मिलते रहते थे परंतु यह खेलों में कम भाग लेते थे।  गांधी जी ने श्रवण की प्रति भक्ति और सत्यवादी हरिश्चंद्र नाटक देख कर अपने माता पिता की सेवा सद्गुणे की प्रतिज्ञा की


गांधीजी की शिक्षा 

 इनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई 13 वर्ष की आयु में ही इनका विवाह कस्तूरबा से हो गया मैट्रिक के परीक्षा पास करने के बाद वे वकालत की शिक्षा प्राप्त करने ग्रहण चले गए तथा बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। 


 महात्मा गांधी प्रारंभ हुई 18 वर्ष की अवस्था में हाईस्कूल पास करने के बाद यह वकालत।  यह चलन के कारण शिक्षक और सहपाठी सभी के प्रिय थे। इनको छात्रवृत्ति और पुरस्कार प्राय मिलते रहते थे परंतु यह खेलों में कम भाग लेते थे।  गांधी जी ने श्रवण की प्रति भक्ति और सत्यवादी हरिश्चंद्र नाटक देख कर अपने माता पिता की सेवा सद्गुणे की प्रतिज्ञा की


 एक  मुकदमे की पैरवी करने जाना पड़ा जहां अंग्रेजों की रंगभेद नीति का शिकार होना पड़ा गांधी जी ने उसके विरुद्ध आवाज उठाई तथा भारी सफलता प्राप्त की


जीवन की घटनाएं

घटनाओं के चक्कर में पड़कर महान मनुष्य पतित भी हो सकता है।परंतु राष्ट्र युग के निर्माता गांधी जी अपने जीवन की घटनाओं से प्रभावित होकर दिनोंदिन चमकते गए।  वकालत करने के बाद एक मुकदमे में दक्षिण अफ्रीका गए वहां के न्यायालय में यह पगड़ी बांधकर गए न्यायधीश ने इन्हें पगड़ी उतारने को कहा परंतु इंकार करने पर इनको न्यायालय से बाहर निकाल दिया 


प्रथम श्रेणी का रेल टिकट लेने पर भी इनको जबरदस्ती ट्रेन से उतार दिया गया।  अगर को चौहान ने घोड़ा में विरोध उन्हें पीटा ।  गांधीजी ने मानवीय व्यवहार से पीड़ित होकर सत्याग्रह किया गांधीजी सत्याग्रह में विजय होकर स्वदेश वापस आए इनके मन में विजय की भावना प्रेरित होकर देश को स्वतंत्र कराने की अभिलाषा जागृत हुई


सन 1920 में असहयोग आंदोलन में विदेशी वस्त्रों सरकारी वस्तुओं का बहिष्कार का कार्य संपन्न हुआ देश में जागृति पैदा हुई मोतीलाल नेहरू,प्लेस बंधु,चितरंजन दास,जमुनालाल बजाज ऐसे व्यक्ति भी मैदान में आ गए। इनको राजद्रोह के मुकदमे चलाकर अनेक बार जेल भेजा गया अनेक कठिनाइयों के बाद स्वतंत्रता का मंगल प्रभाव 15 अगस्त 1947 को देश के बंटवारे के साथ आया। 


विशेषताएं

 बापू अपनी साधना के कारण साधारण मनुष्य से ऊपर उठ गए थे यह समाज सुधारक राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्र थे  इनकी निर्भीकता, सत्य वचन, अहिंसा, देश स्वतंत्रता, हरिजन प्रेम आदि ने देश को बदल दिया।  जो कुछ कहा वही करके दिखलाया धर्म से राजनीति को जोड़कर राम राज्य का आदर्श उपस्थित किया रामराज्य की पूर्ति के लिए जियो और उसी के लिए मरे 


विश्व में स्थान

 गांधी जी ने अपने गुणों के कारण देश में ही नहीं बल्कि विश्व भर में अपना उच्च स्थान बना लिया था इसलिए वह युग दृष्टा महापुरुष, विश्व वंदनीय, राष्ट्र देवता, राष्ट्रपिता, बापू आदि के नाम से संबोधित किए जाते थे 

गाँधीजी के जीवन के आदर्श 

दक्षिण अफ्रीका से लौटकर उन्होंने भारत में भी अहिंसात्मक आंदोलन चलाने का निश्चय किया तथा भारत की स्वतंत्रता के लिए जुट गए।गांधी जी के इस आंदोलन में सारा भारत कूद पड़ा।  1921 में इन्होंने असहयोग आंदोलन चलाया जिससे गोरी सरकार हिल गई इनके नेतृत्व में जनता ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया सन 1930 में नमक सत्याग्रह तथा 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन भी चलाए गए। 


अंग्रेजों ने अनेक बार इन्हें बंदी बनाया और जेल में बंद किया परंतु अंत में अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा और 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वाधीनता मिली देश में विभाजन के समय हिंसा रोकने के लिए गांधी जी ने उपवास किया तथा हिंदू मुस्लिम एकता स्थापित किए गांधी जी ने अछूतोंदार के लिए भी  कार्य किया


उपसंहार 

बिरला मंदिर से लौटते समय  सत्य अहिंसा तथा मानवता के इस पुजारी पर 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नामक एक व्यक्ति ने एक प्रार्थना सभा में गोली मारकर हत्या कर दी जिससे सारे विश्व में शोक छा गया और राम कहकर अमर ज्योति में लीन हो गए । गांधी जी भारत के राष्ट्रपिता थे उनकी शिक्षाएं आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं। 


 महात्मा गांधी पर 10 लाइन पंक्तियां Mahatma Gandhi Essay In Hindi 10 Lines 

1.  महात्मा गांधी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे

2.  उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। 

3.  गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के एक छोटे से शहर पोरबंदर में हुआ था। 

4.  इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। 

5.  वह बापू और राष्ट्रपिता के नाम से भी जाने जाते थे। 

6. गांधी जी का विवाह 15 वर्ष की आयु में हुआ इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा देवी का

7.  गांधीजी ने करो या मरो का अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे प्रसिद्ध नारे दिए। 

8.  महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। 

9.  गांधी जी की हत्या 30 जनवरी 1948 में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर की थी। 

10.  मुझे गर्व है कि मैंने गांधी के देश में जन्म लिया 


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