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 FACT ABOUT AMARAVATI STUPA IN HINDI | HISTORY OF AMARVATI STUPA


नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे हिंदी ब्लॉग में तो तो आज हम बात करेंगे और जानेंगे AMARAVATI STUPA के बारे में इस पूरे लेख में हम जानेंगे अमरावती स्तूप कहां स्थित है और अमरावती स्तूप किसने बनाया है सब कुछ जानिए अमरावती स्तूप के बारे में अंत तक इस लेख को पढ़िए तो बिना आपका लिए समय शुरू करते हैं इस बेहतरीन लेख को


HISTORY OF AMARAVATI STUPA


अमरावती स्तूप प्राचीन भारत कला और वास्तुकला का एक प्रसिद्ध नमूना है AMARAVATI BUDDHIST STUPAआंध्र प्रदेश की प्रस्तावित राजधानी अमरावली के गुंटूर जिले में  स्थित है और इसे  Colin Mackenzie in 1797 ने खोजा था जो कि विजयवाड़ा से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अमरावती स्तूप को महाचैत्य से भी जाना जाता है  यह सैंकड़ों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है इसकी सुंदरता को देखने के लिए लोग दूर-दूर से चले आते हैं 


अमरावती स्तूप आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के साथ स्थित है और ये buddha school of architecture की भव्य कला का अद्भुत अवशेष है। AMARAVATI STUPA का निर्माण तीसरी शताब्दी ईसापूर्व और करीब 250 ईस्वी के करीब किया गया था और यह SANCHI STUPA की तरह लंबा है , ऐसा भी माना जाता है कि इसे महात्मा बुद्ध के अननुयाई सम्राट अशोक के शासन काल मे बनाया गया था 


AMARAVATI STUPAईंट से बना है और एह गोलाकार विधी मे बना है जो कि एक हाथी के ऊपर भगवान बुद्ध को दर्शाती है , AMARAVATI STUPA मे 95 फुट उन्हे प्लेटफॉर्म है जो चारों दिशाओं मे फैलें हैं । यह स्तूप दक्षिण भारत मे मौर्य कला का महत्वपूर्ण नमूना है ,अमरावती में स्थित इस सुंदर स्तूप की बनावट ना केवल आकर्षण करती हैं बल्कि टोक्यो पर बनी कलाकृतियां महात्मा बुध की शिक्षा का अध्ययन कराती हैं




FACT OF AMARAVATI STUPA अमरावती स्तूपा के रोचक तथ्य 

अमरावती स्तूप, जिसे महाचैत्य के रूप में भी जाना जाता है, अमरावती के मुख्य आकर्षणों में से एक है। यह शुरू में भगवान बुद्ध के एक महान अनुयायी, सम्राट अशोक जिसने बाद के वर्षों में बौद्ध धर्म अपना लिया था, के शासनकाल में बनवाया गया था। स्तूप बनाने का काम वर्ष 200 ईसा पूर्व में पूरा हुआ, तथा स्तूप पर की गई नक्काशियां, बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के जीवन की कहानी का चित्रण करती हैं।


जब अमरावती सातवाहन शासकों की राजधानी बना, तो स्तूप को चूना पत्थर से सजाया गया तथा उन पर बुद्ध की स्वतन्त्र खड़ी मूर्तियों को उकेरा गया। हालांकि, बौद्ध धर्म में गिरावट के साथ-साथ, स्तूप भी उपेक्षित हो गये और 1796 ई. में इस स्थल का दौरा करने वाले कर्नल कॉलिन मैकेंज़ी नें इन चीजों को दबा हुआ पाया। जब खुदाई का काम शुरू किया गया, तो स्तूप के साथ ही कई अन्य मूर्तियां का भी पता लगा एवं उन्हें बाहर निकाला गया। आज पूरे दक्षिण भारत के पूरे में, एकमात्र स्तूप ही अशोक स्तंभ के उदाहरण है। 


अमरावती स्तूप किस से बना है AMARAVATI STUPA IS BUILT BY

अमरावती स्तूप पहले एक चूना पत्थर से बनी साधारण संरचना थी लेकिन जब  अमरावती सातवाहन की राजधानी बना तो सातवाहन ने इसका निर्माण किसने करवाया और इसे एक वास्तु शिल्प स्ममार्क का रूप दे दियाइसके साथ ही इस पर महात्मा बुध का जीवन चित्रण किया गया है हालांकि जैसे-जैसे बौद्ध धर्म का अस्तित्व कम होता गया वैसे वैसे इस स्तूप की अपेक्षा की बढ़ती चली गई 


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ऐसा भी माना जाता है कि ब्रिटिश के अधिकारी कर्नल कॉलिंग मैगजीनी ने जब इस स्थल का दौरा किया तो इस स्थल कि खुदाई शुरू की और उस समय इस स्तूप का पता चला , वास्तुकला और मूर्ति कला के इस भव्य स्तूप के कुछ अवशेष ही बचे हैं जिन्हे संग्रहालय मे सुरक्षित रखा गया है , आपको बता दें अमरावती मूर्ति की सुंदर शैली अपने भव्य उभारदार भित्ति चित्रों के लिए काफी मशहूर हैऔर इसके साथ ही यह दक्षिण भारत मे स्थित अशोक स्तम्भ का निर्माण है 


तो दोस्तो यह थी पूरी कहानी अमरावती स्तूप अगर आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ सांझा जरूर करें



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