सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिन्दी मे - chanakya niti in hindi

 सम्पूर्ण चाणक्य नीति हिन्दी मे - chanakya niti in hindi 

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नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग himachaljosh.in मे जहां आपको मिलती है hindi moral stories ,hindi inspirational stories ,motivational story in hindi, hindi biography जैसे और भी सीखने वाले हिन्दी लेख और मैं ले के आया हूँ आपके लिए chanakya niti in hindi जिसमे मैंने आपको बताया है चाणक्य नीति के बारे मे जहां बताया है कैसे अपनी कुटिल नीतियों से चाणक्य ने एक नया शासन खड़ा कर दिया और अगर यह लेख  लगे तो अपने दोस्तों के साथ इन्हे जरूर share करें, तो चलिए दोस्तों बिना आपका समय लिए पढ़ते हैं पूरी chanakya niti in hindi मे 


चाणक्य नीति हिन्दी मे chanakya niti in hindi 

दोस्तों चाणक्य भारत के सबसे बुद्धिमान लोगों मे से एक थे जिन्होंने अपनी कुटिल चालों से एक शासक को खत्म किया और एक नया दूसरा शासक खत्म किया। चाणक्य से जुड़े कुछ ऐसे किस्से हैं jयहाँ चाणक्य ने अपनी कुटिल नीतियों का इस्तेमाल किया और बड़ी ही सूझ बूझ दिखाई इस लेख मे हम जानेंगे की कैसे चाणक्य ने चन्द्रगुप्त मौर्य को शिक्षा दी और कैसे दुश्मन पे चाल चल के दुश्मन को खत्म किया। चाणक्य के हर चाल और नीति मे सीख होगी और अंत मे आप बहुत कुछ सीख के ले के जाएंगे 


दोस्तों चाणक्य इतिहास मे दर्ज एक महान नाम है, चाणक्य कुछ ऐसी चाले चलते थे जिनका उनके किसी भी दुश्मन को भनक नहीं लगती थी इन्ही कुटिल चालों से चाणक्य को लोग कौटिल्य भी पुकारने लगे चाणक्य एक बहुत ही बड़े विद्वान पंडित थे 


चाणक्य का जन्म 375 बक मे एक ब्राह्मण परिवार मे हुआ था चाणक्य ने बहुत ही छोटी उम्र मे तकरीबन सभी वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था चाणक्य जैसे जैसे बड़े हुए उन्हे राजनीति मे रुचि होने लगी , चाणक्य ने तकशिला जाकर ज्ञान हासिल किया और फिर वहीं पर छात्रों को ज्ञान देना शुरू कर दिया और उनके शिष्य उनका बहुत सम्मान करते थे क्योंकि चाणक्य तकशिला के एक महान अध्यापक बन चुके थे और उन्हे तकशिला दल का राष्ट्रपति बना दिया जिसका मकसद गरीब लोगों को आर्थिक सहायता देना होता था 


इसी सिलसिले मे जब चाणक्य राजा धनानन्द से मिले तो उन्होंने चाणक्य की बुरी शक्ल होने का अपमान किया चाणक्य ने इस अपमान को सहन कर लिया और समय समय पर राजा को आयना दिखाया बाकी लोगों की तरह चाणक्य ने राजा की झूठी प्रशंसा नहीं की अगर देखा जाए तो चाणक्य ने अपना कर्तव्य बड़े ही अच्छे से निभाया परंतु राजा को चाणक्य का यह अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं आया और राजा ने चाणक्य को राष्ट्रपति पद से हटा दिया 


चाणक्य बिना मतलब के ही एक घमंडी और बेअक्ल राजा का शिकार बना लेकिन चाणक्य उन मे से नहीं थे जो चुप बैठते उन्होंने कहा कि वह उन्हे कोई कुत्ता ना समझे जो राजा के इतने अपमान के बाद राजा के तलवे चाटेगा , चाणक्य ने कहा कि उनके पास महान विद्या है जिसको इस्तेमाल करके वह एक इस राजा के राज को खत्म कर ऐसे कै राज्य बना सकते हैं 


चाणक्य उस समय वहाँ से चले गए और हिमालय के एक गाँव मे गए जहां बच्चे राजा और प्रजा का खेल खेल रहे थे और वहाँ एक लड़का राजा बना था। चाणक्य ने देखा कि इस लड़के मे राजा बनने के सभी गुण है चाणक्य की एक खास बात यह भी थी कि वह मनुष्य को देखर उनके गुणों का पता लगा लेते थे 




चाणक्य उस बालक के पास गए और कहने लगे की तुम राजा हो और मई ब्राह्मण तुमसे दान मांगने आया हूँ तो उस लड़के ने कहा वो जो बकरियाँ तुम्हें दिख रही है उन्हे ले जाओ चाणक्य ने कहा कि यह बकरियाँ तो तुम्हारी नहीं है तो उस लड़के ने जावाब दिया की जिस गाँव मे ब्राह्मण का सम्मान ना हो वो गाँव या जगह कभी नहीं फलती इसलिए तुम इन बकरियों को ले जा सकते हो तुम्हें जो कोई भी रोकेगा उसे मई देख लूँगा 


यह बालक कोई और नहीं बल्कि चन्द्रगुप्त मौर्य था जो बाद मे चाणक्य की शिक्षा पाकर मगद का राजा बना और चाणक्य ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए धनानन्द के राजा के खिलाफ खड़ा कर दिया । एक बार चन्द्रगुप्त मौर्य लड़ाई हारने के बाद चाणक्य से बातचीत करने आते हैं चाणक्य ने कहा कि पहले कहना कहा लो लेकिन चन्द्रगुप्त चाणक्य से कहना खाने से पहले बातचीत करना चाहते थे परंतु अंत मे उन्होंने अपने गुरु की बात मान ली और खाना खाने लगते हैं 


चाणक्य चन्द्रगुप्त मे खाने की पत्तल देते हैं लेकिन बीच मे से पकड़ने से चन्द्रगुप्त को पत्तल गरम लगती है चाणक्य कहते हैं की पत्तल को बीच मे से नहीं कोनों से पकड़ो , चन्द्रगुप्त ने ठीक वैसे ही किया और कहना खाने के बाद जब चन्द्रगुप्त उठे तो कहने लगे कि मुझे आपसे अपनी हार के बारे मे सवाल करने है , चाणक्य ने कहा तुम्हारे सारे हार के जवाब मैंने अभी तुम्हें दे दिए है जब तुमने पत्तल बीच से पकड़ी और वह तुम्हें गरम लगी 


पत्तल की तरह ठीक तुम्हें आस पास के कोनों को जीतना होगा फिर अंत मे धनानन्द के खिलाफ हमला करना , कुछ समय बाद चन्द्रगुप्त लड़ाई जीतने के बाद चाणक्य के पास आते हैं और कहते हैं कि हमने युद्ध जीत लिया चाणक्य कहते हैं कि यह आवश्यक नहीं है कि तुमने युद्ध जीता यह बताओ सैनिकों के लिए युद्ध मे खाना कहा से किया तो उसने कहा आस पास के गाँव वालों ने सेना को खाना दिया .. 


चाणक्य कहते हैं कि तुमने उन्हे क्या दिया चन्द्रगुप्त सर हिलाकर कहते हैं कि मैंने उन्हे कुच्छ नहीं दिया तो चननकी कहते हैं कि याद रखना राजा के लिए सूके लिए सबसे बड़ी होती है प्रजा और यह तुम्हारा पहला कर्तव्य है कि तुम राज्य के लोगों की मदद करो । 


Chanakya Niti about marriage in hindi 

एक दिन चाणक्य राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के पास गए वहाँ चन्द्रगुप्त उदास थे चाणक्य ने पूछा कि तुम उदास क्यों हो तो चन्द्रगुप्त कहता है कि उसे मगद के राजा की बेटी से प्यार हो गया है और उनके बिना बेचैन सा रहता हूँ तो इसपर चाणक्य कहते हैं कि प्यार एक बहुत आम सा आकर्षण है जो कि हर स्त्री पुरुष के बीच होता है तथा तुम्हें इसके बारे मे ना सोच कर अपने काम काज पर ध्यान देना चाहिए और सफलता की ओर बड़ना चाहिए और राजा बनने के लिए तुम्हें अलग से सोचना होगा 


एक दिन वह ही आता है जब पड़ोसी राज्यों की मदद से मगद के राजा पर हमला कर दिया जाता है और युद्ध जीत लिया जाता है और चंद्रगुप मौर्य मगद के राजा बन जाते हैं और चाणक्य प्रधानमंत्री और इसी समय चाणक्य ने 2 माहान किताबें लिखी नीति शस्त्र और अर्थशास्त्र , चाणक्य रोज चन्द्रगुप्त के खाने मई थोड़ा थोड़ा जहर मिलाते थे असल मे वह चंद्रगुप को बलशाली बना रहे थे ताकि कोई भी चन्द्रगुप्त को जहर देकर मार ना सके 


एक दिन चाणक्य का जहरीला खाना चन्द्रगुप्त की पत्नी कहा लेती है और वह मार जाती है हालाकी चाणक्य रानी को तो नहीं बचा सकते लेकिन वह उसके बच्चे को बचा लेते हैं और जिसका नाम रकहा जाता है बिन्दुसारा और यह बाछा बड़ा होके मगद का उत्तराधिकारी यानि राजा बनता है और इसके बाद आचार्य चाणक्य जंगलों मे चले जाते हैं और वही पर उनका देहांत हो जाता है 


तो दोस्तों यह थी चाणक्य की कहानी जिन्होंने एक शासक को खत्म कर दूसरे शासक को खड़ा कर दिया था और इससे हमे बहुत सी सीख मिलती है 



Chanakya Niti hindi thoughts


1. फूल की खुशबू और व्यक्ति कि अच्छाई जल्द ही चारों ओर फैल जाती है जैसे चननकी जल्द ही राष्ट्रपति बने थे 


2, शक्ल से ज्यादा अक्ल का होन जरूरी होता है , चाणक्य सुंदर नहीं थे लेकिन अक्लमंद थे 


3, आप अगर बड़े स्थान पर बैठे हो तो किसी को भी छोटा मत समझे एक आम इंसान भी आपको बर्बाद कर सकता है जैसे चाणक्य ने उस राजा को किया और उससे उसका सब कुछ चीन लिया 


4.अपने दुश्मन को पहले कमजोर करो ताकि तुम बाद मे उसपर आसानी से वार कर सको जैसे कि चाणक्य ने मगद के राजा के साथ किया और उसका राज्य उससे छीन लिया 


5. एक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह उस मनुष्य का भला करें जिसने उसका भला किया हो 


6. प्रेम उस व्यक्ति के लिए बाधा है जो व्यक्ति अपनी जिंदगी मे कुछ बड़ा और असंभव करना चाहता है 


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