2020 प्राकृतिक सुंदरता पर 9 बेहतरीन कविताएं 9 + new best poems on nature in hindi for class 1-10

प्राकृतिक सुंदरता पर 9 बेहतरीन कविताएं 9 + बेस्ट poem on nature in hindi for class 1-10



नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे हिन्दी ब्लॉग himachaljosh.in और आज मई ले के आया हूँ आओके लिए कुछ प्राकृतिक कविताएं और मई उम्मीद करता हूँ कि आपको ये कविताएं पसंद आए और अगर पसंद आए तो इन्हे share जरूर करें तो चलिए शुरू करते हैं आपका बिना समय लेकर

1. प्राकृतिक संदेश 

पर्वत कहता शीश उठाकर,

तुम भी ऊंचे बन जाओ 

सागर कहता है लहराकर ,

मन मे गहराई लाओ 


समझ रहे हो क्या कहती है 

उठ - उठ गिर गिर तरंग तल । 

भर लो भर लो अपने दिल मे ,

मीठी मीठी मृदुल उमंग 


पृथ्वी कहती है धैर्य न छोड़ो ,

कितना ही हो सिर पर भार । 

नभ कहता है इतना फैलो,

धक लो टीम सारा संसार 


2. पेड़ काटना बंद करो 

पेड़ों को तुम काट रहे हो ,

प्रदूषण को तुम पाल रहे हो,

पेड़ों को तुम काट रहे हो ,

प्रदूषण को तुम पाल रहे हो,

इस जीवन को मानव संकट मे क्यों डाल रहे हो ,

जो पेड़ तुम्हें जीवन देते उन्ही का जीवन तुम लेते हो ,


पेड़ों को तुम काट काट संकट को बुलावा देते हो,

पेड़ों को तुम काट काट संकट को बुलावा देते हो,

युही पेड़ों को काटोगे तो साफ वातावरण को तरसोगे,

धरती जमीन बंजर हो जाएगी तुम दाना पानी को तड़पोगे,


ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से तुम फिर कैसे बच पाओगे 

हर जगह प्रदूषण पाओगे बीमारी से तुम मार जाओगे 

अभी  मौका है सुन मानव,पेड़ों को काटना बंद कर 

सुखी जीवन जीना है तो पेड़ काटना बंद करो

पेड़ काटना बंद करो 




3. पेड़ लगाओ जीवन बचाओ 

जीवन के शृंगार पेड़ है,

जीवन के आधार पेड़ हैं ,

ठिगने लंबे मोटे पतले,

भाँट भतीले डार पेड़ है ,

जीवन के शृंगार पेड़ है.. 


आसमान मे बादल लाते 

बरखा के हथियार पेड़ है,

बीमारों को दावा ये देते ,

जीवन वायु औजार पेड़ हैं ,

जीवन के शृंगार पेड़ है  


रबड़ कागज लकड़ी देते ,

पक्षियों के घरबार पेड़ हैं ,

शीतल छाया फल ये  देते ,

कितने ये दातार पेड़ हैं 

जीवन के शिगार पेड़ हैं । 


4 आओ पर्यावरण बचाएं 

बदले हम तस्वीर जहां की ,

सुंदर सा एक हश्र बनाए ,

संदेश ये हम सब तक फैलाएं ,

आओ पर्यावरण बचाए । 


फ़ाइल रहा है प्रदूषण खूब 

काट रहा मनुष्य जंगल वन 

हवा हो रही है जहरीली 

कमजोर पद रहा है सबका तन ,

समय आ गया है कि मिलकर,

हम सब कदम उठायें 

संदेश ये हम सब तक फलाएं ,

आओ पर्यावरण बचाए.. 


प्रयोग करें गाड़ी का कम ,

पैदल चलने पर जोर दें हम ,

थैले रखे कपड़े के हम ,

प्लास्टिक रखना छोड़ दे हम ,


अहंकार को छोड़ कर बातें ,

ये हम अब सब को समझाए  ,

संदेश ये हम सब तक फैलाएं ,

आओ पर्यावरण बचाए 

आओ पर्यावरण बचाएं । 




5 नज़ारे देखो प्रकृति के 

फूलों का रंग देखो ,

खुशियों के संग देखो ,

दिल कि तरंग देखो ,’

मन कि उमंग देखो ,


रिमझिम फुहार देखो ,

सावन की बहार देखो ,

नाचें नर और नायर देखो ,

सुंदर ये संसार देखो । 


धरती की मुस्कान देखो ,

ऊपर ये आसमान देखो ,

सारे एक सामान देखो ,

अलौकिक से जहान देखो । 


मिलवर्तन भाईचारा देखो ,

सूर्य छाँट सितारा देखो ,

एकत्व का पसार देखो ,

अधबुद ये नजारा देखो । 


खेतों की हरियाली देखो ,

कहीं भरी कहीं खाली देखो 

मुख पर आभा लाली देखो ,

जीवन मे खुशहाली देखो। 


6 short hindi poem on nature

चिड़ियों से है उड़ना सीखा तितली से एकलाना ,

भँवरों के गुँजर से सीखा राग मधुर का गाना ,

तेज लिया सूरज से हमने चाँद से ली छाया ,

टिम टिम करते तारों कि हम समझ गए माया.. 


सागर ने सिखलाई हमको गहरी सोच की धारा ,

गगन चूमी पर्वत से सीखा ऊंचा लक्ष हमारा , 

समय कि टिक टिक सदा ही चलते रहना ,

मुश्किल कितनी भी आन पड़े कभी ना डरना ,




7. देखो हमारी प्रकृति 

कितनी सुंदर कितनी रंगमई देखो हमारी प्रकृति ,

कहीं पेड़ और कहीं नदी देखो हमारी प्रकृति ,

कहीं मारू फैले हुए कहीं उपवन से भारी ,

कहीं मंडराती तितलियाँ कहीं शंखों से सजी ,

देखो हमारी प्रकृति देखो हमारी प्रकृति । 


कहीं घुमड़ आए मेघ काले कहीं तप्ती वसुधा ,

कहीं नाचते मोरों का झुंड कहीं पर्वत पर शांत हवा ,

देखो हमारी पप्रकृति , देखो हमारी प्रकृति । 


8. पर्यावरण 

धरती मा का करे शृंगार ,

वृक्ष लगाएं कई हजार 

हर परिवार को अपना वन , 

चारा पत्ती फल ईंधन । 


वन है तो जीवन है 

हरियाली है तो खुशहाली है 

व संवर्धन जन कल्याण ,

वन विनाश से दुख महान । 


परती  धरती करे पुकार

वृक्ष लगावे कै हजार ,

धरती हमे बनाना है ,

वन विस्तार बढ़ाना है ,


हर गाँव शहर का अपना वन ,

कोई कभी हो न निर्धन ,

समृद्धि का है एक निधान ,

वृक्ष लगाएं हर इंसान । 




9  Nature poems hindi

तू दुनिया की चादर बनके सबकी जान बचाए रे  ,

सूरज ने जब गर्मी उगली तब तूने छाया डाली रे ,

बादल जब बारिश बनके पिघले , छाता बनके आए रे ,

जब प्यास को मरने आया , तूने प्यास भुजाया रे । 


सबको तूने जीवन दिया हमने तेरा दिल दुखाया रे , 

भो विलास चक्कर मे हमने प्रदूषण्ण हमने फैलाया रे ,

तूने हमे अमृत दिया हमने जहर बनाया रे ,

इंसानों कि कर्म कि सजा सबने मिलकर पाया रे , 

ही धरती मा माफी दे हमपर कर दया रे,

पर्यावरण का ख्याल रखेंगे आज से शप्त खाया रे । 


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